1. बाज़ार और रेगुलेटर (Market & Regulators)
NSE: National Stock Exchange (नेशनल स्टॉक एक्सचेंज – भारत का सबसे बड़ा एक्सचेंज)
BSE: Bombay Stock Exchange (बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज – भारत का सबसे पुराना एक्सचेंज)
SEBI: Securities and Exchange Board of India (शेयर बाज़ार को कंट्रोल करने वाली सरकारी संस्था)
NSDL: National Securities Depository Limited (जहाँ आपके शेयर डिजिटल फॉर्म में सुरक्षित रहते हैं)
CDSL: Central Depository Services Limited (NSDL की तरह ही दूसरी डिपॉज़िटरी)
DP: Depository Participant (आपका ब्रोकर, जैसे Zerodha, Upstox, Groww आदि)
2. अकाउंट और पब्लिक ऑफर
DEMAT: Dematerialized Account (शेयरों को डिजिटल फॉर्म में रखने वाला अकाउंट)
AMC: Annual Maintenance Charge (ब्रोकर द्वारा हर साल ली जाने वाली अकाउंट फीस)
IPO: Initial Public Offering (जब कोई कंपनी पहली बार शेयर बाज़ार में अपने शेयर लाती है)
FPO: Follow-on Public Offer (IPO के बाद जब कंपनी दोबारा नए शेयर लाती है)
OFS: Offer for Sale (जब कंपनी के मालिक/प्रमोटर्स अपने शेयर पब्लिक को बेचते हैं)
3. ट्रेडिंग और ऑर्डर्स (Trading & Order Types)
CNC: Cash N Carry (डिलीवरी ट्रेडिंग – शेयरों को खरीदकर कई दिनों या सालों तक रखना)
MIS: Margin Intraday Square-off (इंट्राडे ट्रेडिंग – उसी दिन खरीदकर उसी दिन बेचना)
AMO: After Market Order (बाज़ार बंद होने के बाद 3:30 PM से अगले दिन 9:00 AM के बीच लगाया जाने वाला ऑर्डर)
GTT: Good Till Triggered (एक ऐसा ऑर्डर जो 1 साल तक वैलिड रहता है, जब तक आपका प्राइस न आ जाए)
SL: Stop Loss (नुकसान को एक लिमिट में रोकने वाला ऑर्डर)
SL-M: Stop Loss Market (मार्केट प्राइस पर स्टॉप लॉस काटना)
LTP: Last Traded Price (किसी शेयर का बिल्कुल ताज़ा / करेंट प्राइस)
ATH: All Time High (किसी शेयर का आज तक का सबसे ऊँचा प्राइस)
ATL: All Time Low (किसी शेयर का आज तक का सबसे निचला प्राइस)
4. फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O / Derivatives)
F&O: Futures and Options
CE: Call European (Call Option – जब मार्केट ऊपर जाने की उम्मीद हो)
PE: Put European (Put Option – जब मार्केट नीचे जाने की उम्मीद हो)
ATM: At The Money (वह स्ट्राइक प्राइस जो करेंट मार्केट प्राइस के बिल्कुल पास हो)
ITM: In The Money (वह स्ट्राइक प्राइस जिसे मार्केट पार कर चुका है)
OTM: Out of The Money (वह स्ट्राइक प्राइस जहाँ मार्केट को अभी पहुँचना है)
OI: Open Interest (मार्केट में खुले हुए कुल कॉन्ट्रैक्ट्स की संख्या)
IV: Implied Volatility (मार्केट का डर या भविष्य का उतार-चढ़ाव)
PCR: Put Call Ratio (बाज़ार का मूड पता करने का एक फॉर्मूला)
5. कंपनी का विश्लेषण (Fundamental Analysis)
PE Ratio: Price to Earnings Ratio (यह बताता है कि शेयर महँगा है या सस्ता)
EPS: Earnings Per Share (कंपनी अपने एक शेयर पर कितना मुनाफा कमा रही है)
ROE: Return on Equity (कंपनी अपने शेयरधारकों के पैसे पर कितना रिटर्न दे रही है)
ROCE: Return on Capital Employed (कंपनी अपने कुल पैसे और कर्ज पर कितना रिटर्न कमा रही है)
CAGR: Compound Annual Growth Rate (सालाना कंपाउंडिंग ग्रोथ का प्रतिशत)
YOY: Year Over Year (पिछले साल के मुकाबले इस साल की ग्रोथ)
QOQ: Quarter Over Quarter (पिछले तिमाही/क्वार्टर के मुकाबले इस तिमाही की ग्रोथ)
6. म्यूच्यूअल फंड्स (Mutual Funds)
SIP: Systematic Investment Plan (हर महीने एक तय रकम निवेश करना)
NAV: Net Asset Value (म्यूच्यूअल फंड की एक यूनिट का करेंट प्राइस)
AUM: Assets Under Management (म्यूच्यूअल फंड कंपनी के पास कुल कितना पैसा मैनेज होने के लिए है)
ETF: Exchange Traded Fund (म्यूच्यूअल फंड जिसे शेयर की तरह बाज़ार में खरीदा/बेचा जा सके)